Wednesday, May 23, 2018

यूं तो बातों का सिलसिला
बोहोत देर तक चलता रहा
लेकिन हमारे रूह
कुछ ख़ामोश से थे
शायद उन खामोशियों
में ही हम
एक दूजे को खोजने की
कोशिश कर रहे थे

Monday, May 21, 2018

कैसी अनबन है ये
हमारे बिच ?
क्यों ये लम्हे हम
साथ बटोरते है ?
अगले जनम में
मिलने की तैयारी है
या पिछले जनम का
कोई हिसाब है बाकी?
सभी गुंजाइशों को
दिमाग़ टटोलता रहता है
और एक ये दिल है
जो बस तुम्हारी ओर
निकल पड़ता है!